Thursday, February 5, 2026
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सप्तदशक सूत्रम’ : सफल होना है तो ये 70 सूत्र आजमाएं

सफलता सभी को चाहिए । सभी जीवन में सफलता का स्वाद चखना चाहते हैं । भले ही हर एक के लिए सफलता की परिभाषा और पैमाने अलग-अलग हैं लेकिन अपने जीते जी वह इससे कम पर राजी नहीं । कुछ लोग जैसा सोचते हैं पा जाते हैं । कुछ लोग सफलता के मौके चूकते जाते हैं और कई लोग तो यह समझ ही नहीं पाते कि सफलता वो किसे कहें । सांसारिक उन्नति को, आध्यात्मिक उन्नति को या फिर अपने मन की कर ले जाने को, बस । जितने लोग, उतनी महत्वाकांक्षाएं । पर, वास्तव में सफलता है क्या ? इसे पाने का रोडमैप क्या हो और अगर मिल जाए तो उसे संभालना-संवारना कैसे है ? यह मंत्र तो कोई अनुभवी विद्वान या गुरु ही बता सकता है और इसी कार्य को कर गुजरे हैं प्रोफेसर पुष्पेंद्र कुमार आर्यम जी । अपनी नई पुस्तक ‘सप्तदशक सूत्रम’ में उन्होंने बड़े करीने से एक-एक बात बड़ी बारीकी और साफगोई से बताई-सिखाई है कि सफलता की सीढ़ी चढ़ी कैसे जाती है ।
पत्रकारिता और लेखन से शुरुआत करने वाले प्रोफेसर आर्यम एक आध्यात्मिक गुरु हैं और मसूरी में आर्यम इंटरनेशनल फाउंडेशन के संस्थापक हैं, जिसकी विदेशों में भी प्रकल्प चलते हैं । उनके हजारों अनुयायी हैं और नियमित रूप से धार्मिक-आध्यात्मिक अनुष्ठान करते रहते हैं । कई पुस्तकें लिख चुके आर्यम जी के पास व्यवहारिक और पेशेवराना जीवन का भी लंबा अनुभव है । ‘सप्तदशक सूत्रम’ शीर्षक सुनकर यह कोई धर्म-आध्यात्म की बात करने वाली पुस्तक लग सकती है लेकिन दरअसल इसमें जीवन में सफल होने के 70 (सप्त दशक) सूत्र यानी टिप्स बताये गए हैं ।
यह पुस्तक आपको केवल सफल बनाने के लिए नहीं है, बल्कि आपका रूपांतरण करने के लिए है, जिसका माध्यम सफलता है। इस कलियुग में सफल होना आम बात बन चुकी है, किंतु कितने हैं, जो उस सफलता को संभाले हुए हैं, जो उसको भोग रहे हैं। यह पुस्तक बताती है कि सफलता केवल परिस्थितियों का फल नहीं, बल्कि सजग पुरुषार्थ, स्पष्ट दृष्टि और विवेकपूर्ण निर्णयों का परिणाम है।
पुस्तक के 70 सूत्र प्रत्येक क्षेत्र को स्पर्श करते हैं- लक्ष्य निर्धारण, बाधाओं से जूझना, संदेह से मुक्त होना, सकारात्मक सोच, स्मरण-शक्ति, नेतृत्व, समय-प्रबंधन, इच्छाशक्ति, आत्मविश्वास और शिष्टाचार। प्रत्येक अध्याय आपको अपने जीवन में बदलाव लाने के लिए प्रेरित करता है। आत्मानुशासन, सेवा-भाव और निरंतर अभ्यास से ही सफलता की ओर बढ़ा जा सकता है । बस, पुस्तक में बताई गई व्यवहारपरक दिनचर्या को अपना लें, और सफलता का स्वाद चखें ।
दिल्ली के प्रतिष्ठित प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक उन सभी के लिए है, जो स्वयं को निखारना, अपने कार्य-जीवन में प्रगति करना और अपने भीतर के श्रेष्ठ व्यक्तित्व को सामने लाना चाहते हैं।

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