नई दिल्ली। अहिंसा विश्व भारती एवं विश्व शांति केंद्र के संस्थापक जैन आचार्य लोकेशजी ने दिल्ली विश्वविद्यालय में दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “विशाल भारत से सीख: संस्कृति, जलवायु और इतिहास” का उद्घाटन किया | राष्ट्रीय सुरक्षा जागरूकता मंच एवं विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी जयपुर के सहयोग से हिमालय अध्ययन केंद्र, दिल्ली विश्वविद्यालय तथा शांति एवं संघर्ष समाधान केंद्र, जामिया मिलिया इस्लामिया द्वारा आयोजित सम्मेलन में अल्पसंख्यक आयोग राजस्थान के पूर्व अध्यक्ष श्री जसबीर सिंह, फैंस के राष्ट्रीय महासचिव श्री विक्रमादित्य सिंह, प्रख्यात पत्रकार श्री उदय महुरकर, श्री हर्ष त्रिपाठी, व प्रो विजय कुमार भी उपस्थित थे | दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बिंदया वासिनी पाण्डेय ने स्वागत भाषण दिया |
विश्व शांति दूत जैन आचार्य लोकेश जी ने इस अवसर पर कहा कि युद्ध व हिंसा किसी समस्या का समाधान नई है | भारतीय संस्कृति के मूल मंत्र “वसुधैव कुटुम्बकम्”, अहिंसा, करुणा, मानवता आधारित संवाद से युद्ध व हिंसा को रोका जा सकता है |
विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी के कुलपति श्री जसबीर सिंह जी ने कहा कि यदि हम अपनी सांस्कृतिक जड़ों को समझें, प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखें और इतिहास से प्रेरणा लें, तो एक समृद्ध, शांतिपूर्ण और सतत भविष्य का निर्माण संभव है |
प्रख्यात पत्रकार श्री उदय महुरकर व श्री हर्ष त्रिपाठी ने कहा कि भारत का इतिहास त्याग, संघर्ष, ज्ञान और आध्यात्मिकता से परिपूर्ण है। इससे हमें साहस, एकता और आत्मनिर्भरता की प्रेरणा मिलती है, मूल्यों पर आधारित जीवन ही स्थायी प्रगति का आधार है |
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठ नेता श्री इंद्रेश कुमार जी ने डॉ शकील हुसैन, डॉ एन. आर. गोपाल, श्री सत्य प्रकाश सिंह द्वारा लिखित पुस्तक ‘विशाल भारत : सांस्कृतिक और सभ्यतागत चेतना’ का लोकार्पण किया |

