नई दिल्ली। देशभर में इस साल की दुर्गा पूजा की तैयारियां शुरू हो गई हैं। रामकृष्ण मिशन,नई दिल्ली के सचिव स्वामी सर्वलोकानंद ने पाॅजिटिव मीडिया को मिशन की दुर्गा पूजा का इतिहास व विशेषता बताई। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली स्थित केंद्र में वर्ष 2023 से देवी जागरण और दुर्गा पूजा की शुरुआत बहुत ही भव्य, सात्विक एवं शास्त्रसम्मत रीति से की गई। इससे पहले केवल अष्टमी के दिन चित्र (फोटो) में पूजा होती थी। मिशन में 16 अक्टूबर को दुर्गा षष्ठी से पूजा शुरू होकर विजयादशमी तक चलेगी।
सात्विकता और भक्ति : यहाँ सप्तमी, अष्टमी और नवमी को पूजा तथा दशमी को विसर्जन होता है। पूजा में बाहरी दिखावे और आडंबर के बजाय आंतरिक भक्ति, सरलता और शास्त्रोक्त विधियों के पालन पर जोर दिया जाता है।
दुर्गा पूजा का वास्तविक भाव व ‘थीम’
सच्चा उद्देश्य : माँ दुर्गा की पूजा का मूल उद्देश्य यही है कि हम अच्छे मनुष्य और आदर्श नागरिक बनें। हमारे भीतर की कुप्रवृत्तियाँ (दुर्गुण) समाप्त हों और हृदय श्रेष्ठ विचारों से भर जाए।
आधुनिक युग के ‘राक्षस’ : माँ दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज के समय में बुराइयाँ लोगों के भीतर कुप्रवृत्तियों और नकारात्मक विचारों के रूप में छिपी हैं। इसलिए पूजा मात्र खान-पान या तड़क-भड़क के लिए नहीं, बल्कि आत्म-सुधार और आंतरिक भक्ति भाव जागृत करने के लिए होनी चाहिए ।
नवरात्र एवं विभिन्न रूपों की महत्ता
माँ के नौ रूप : भक्त किसी एक रूप से संतुष्ट नहीं होता, वह माँ को विभिन्न स्वरूपों में पूजना चाहता है। इसी कारण सनातन धर्म में ईश्वर के कई रूपों की उपासना की परंपरा है।
आंतरिक भाव की प्रधानता : व्यक्ति चाहे उपवास रखे, फलाहार करे या सात्विक अथवा राजसिक भोग लगाए, सबसे महत्वपूर्ण यह है कि उसके हृदय में माँ के प्रति सच्चा भक्ति भाव जागृत हो रहा है या नहीं।
युवाओं और समाज के लिए संदेश
स्वामी विवेकानंद की प्रार्थना : युवाओं को स्वामी विवेकानंद के भाव को अपनाना चाहिए, जिन्होंने माँ जगदम्बा से प्रार्थना की थी कि उनकी दुर्बलता और कायरता दूर हो और वे सच्चे ‘मनुष्य’ बनें।
संस्कारों की आवश्यकता : आज समाज और युवाओं में बढ़ती हिंसा व दुर्बलता पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि माता-पिता को बच्चों को केवल अंक लाने या नौकरी पाने की होड़ में डालने के बजाय अच्छे संस्कार, सेवा भाव और श्रेष्ठ इंसान बनने की सीख देनी चाहिए।
रामकृष्ण मिशन के विभिन्न केंद्रों में पूजा की परंपरा
दो प्रकार की पद्धतियाँ : कुछ केंद्रों (जैसे बंगाल और कुछ मुख्य शाखाओं) में प्रतिमा बनाकर सप्तमी से दशमी तक विस्तृत रूप से पूजा होती है, जबकि देश-विदेश के अधिकांश केंद्रों में अष्टमी के दिन फोटो में ही पूजा-अर्चना संपन्न की जाती है ।
श्रद्धालुओं से अपील : अंत में उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से यही प्रार्थना करने का आग्रह किया कि माँ हमारे मन की दुर्बलताओं और हिंसा भाव को दूर कर हमें एक नेक और आदर्श इंसान बनाएँ।
रामकृष्ण मिशन की लाइब्रेरी के लिए आरजेएस पीबीएच की पाॅजिटिव मीडिया की दो पुस्तक G-6 प्रदान की गई।
दुर्गा पूजा का संकल्प मन की दुर्बलताओं और हिंसा भाव को दूर कर हम एक नेक और आदर्श इंसान बनें- स्वामी सर्वलोकानंद
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