वृंदावन/नई दिल्ली, 6 फरवरी 2026 — अहिंसा विश्व भारती एवं विश्व शांति केंद्र के संस्थापक जैन आचार्य लोकेशजी ने अपने एक दिवसीय वृंदावन प्रवास के दौरान प्रख्यात आध्यात्मिक संत पूज्य प्रेमानंद जी महाराज से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान दोनों संतों के बीच विश्व शांति, शांति-शिक्षा तथा युवा पीढ़ी के आध्यात्मिक विकास जैसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय महत्व के विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक में दोनों संत इस बात पर सहमत दिखे कि वर्तमान समय में धर्म को अध्यात्म से जोड़ने की आवश्यकता है, क्योंकि अध्यात्म ही वैश्विक शांति का स्थायी मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
जैन आचार्य लोकेशजी ने प्रेमानंद जी महाराज से कहा कि आप दुआ कीजिए युक्रेन रशिया संघर्ष समाप्त कराने की दिशा में तीव्र प्रयत्न जारी है आप दुआ कीजिए कि उसमें शीघ्र सफलता मिले।उस पर प्रेमानंद जी महाराज ने कहा कि यह अध्यात्म के मार्ग से ही संभव है।
प्रेमानंद जी महाराज ने कहा कि, “विश्व शांति केवल नीतियों से नहीं, बल्कि मन की शुद्धि से संभव है। जब व्यक्ति का अंतःकरण शांत होगा, तभी समाज, राष्ट्र और विश्व में शांति स्थापित हो सकेगी। आज युवाओं को प्रेम, करुणा और सेवा आधारित आध्यात्मिक मार्गदर्शन देना अत्यंत आवश्यक है।”
जैन आचार्य लोकेशजी ने कहा कि, “अहिंसा केवल एक विचार नहीं, बल्कि जीवन-पद्धति है। विश्व शांति के लिए अंतरधार्मिक संवाद, करुणा और सहयोग को संस्थागत रूप देना जरूरी है। शांति-शिक्षा को औपचारिक शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।”
चर्चा के दौरान यह भी सुझाव दिया गया कि युवाओं के लिए आध्यात्मिक नेतृत्व कार्यक्रम शुरू किए जाएं और विद्यालयों में नैतिक शिक्षा एवं शांति पाठ्यक्रम को बढ़ावा दिया जाए।
यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक स्तर पर तनाव और ध्रुवीकरण बढ़ रहा है, ऐसे में दोनों संतों का साझा संवाद समाज में सद्भाव और शांति की दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है।

