आज 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व विधि-विधान के साथ शुरू हो गया है। नवरात्रि का पहला दिन मां भगवती के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री को समर्पित होता है। देशभर में श्रद्धालु आज के दिन कलश स्थापना कर देवी मां की पूजा-अर्चना करते हैं और नौ दिनों तक चलने वाले इस महापर्व का संकल्प लेते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि का समय मां दुर्गा की आराधना, साधना और सिद्धि का अत्यंत शुभ काल माना जाता है। इस दौरान भक्त व्रत रखकर, नियमों का पालन करते हुए देवी मां की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। माना जाता है कि इस पावन अवधि में की गई पूजा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
मां शैलपुत्री की पूजा का महत्व
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है, जिन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है। देवी का यह स्वरूप शक्ति, स्थिरता और समर्पण का प्रतीक है। भक्त इस दिन सच्चे मन से पूजा कर अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मजबूती प्राप्त करने की कामना करते हैं।
धार्मिक ग्रंथों में महत्व
देवी भागवत और अन्य धर्म ग्रंथों के अनुसार देवी ही सृष्टि की आदि शक्ति हैं, जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश के रूप में सृजन, पालन और संहार करती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान महादेव के निर्देश पर देवी ने विभिन्न रूप धारण कर रक्तबीज, शुंभ-निशुंभ और मधु-कैटभ जैसे दानवों का संहार किया था।
पूजन विधि
नवरात्रि के पहले दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं। इसके बाद शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना की जाती है। कलश में जल भरकर आम या अशोक के पत्ते लगाए जाते हैं और नारियल स्थापित किया जाता है। इसके पश्चात मां शैलपुत्री की प्रतिमा या चित्र के समक्ष दीप जलाकर फूल, अक्षत, रोली और नैवेद्य अर्पित किया जाता है। दुर्गा सप्तशती का पाठ और मंत्र जाप करने का विशेष महत्व होता है।

