नई दिल्ली। ‘सोसायटी ऑफ रीजेनरेटिव साइंसेज’ द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में विशेषज्ञों ने बताया कि गंभीर दिमागी चोट (TBI) के मरीजों के लिए रीजेनरेटिव मेडिसिन और न्यूरो-रिहैबिलिटेशन नई उम्मीद बनकर उभर रहे हैं। भारत में हर वर्ष 10 लाख से अधिक लोग ट्रॉमैटिक ब्रेन इंजरी का शिकार होते हैं, जबकि एक लाख से अधिक लोगों की मौत हो जाती है। लगभग 60 प्रतिशत मामले सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े हैं।
प्रेस वार्ता में लखनऊ के मरीन इंजीनियर आकाश सक्सेना का मामला साझा किया गया, जो जहाज पर दुर्घटना के बाद छह महीने तक वेजिटेटिव स्टेट में रहे। जनवरी 2022 से मुंबई में रीजेनरेटिव मेडिसिन, व्यापक पुनर्वास और ऑक्सीजन थेरेपी शुरू होने के बाद उनकी स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ। उनका ग्लासगो कोमा स्कोर (GCS) 7 से बढ़कर 15 हो गया है। अब वे बातचीत कर सकते हैं, स्वयं बैठकर भोजन कर सकते हैं तथा सहारे से चलने का प्रयास कर रहे हैं।
संस्था की ओर से डॉ. नंदनी ने बताया कि रीजेनरेटिव मेडिसिन के क्षेत्र में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। विश्वभर में प्रकाशित 960 शोधपत्रों में से 196 भारत से हैं। एम्स, नई दिल्ली और पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ सहित कई संस्थान इस दिशा में महत्वपूर्ण शोध कर रहे हैं।
सोसायटी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा से इस चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने, नियामकीय बाधाएं दूर करने तथा इसे आयुष्मान भारत योजना में शामिल करने की मांग की है। साथ ही, आकाश सक्सेना के परिवार ने भी प्रधानमंत्री से मिलकर अपना अनुभव साझा करने की इच्छा जताई है।

