Friday, January 16, 2026
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आरजेएस पाॅजिटिव मीडिया ने हैबिटेट सेंटर में साझा किया विजन 2026; राष्ट्रीय मीडिया साक्षरता मिशन की उठी मांग

नई दिल्ली – डिजिटल युग में “विश्वसनीयता के संकट” और भ्रामक सूचनाओं की “इन्फोडेमिक” (सूचनाओं की महामारी) से निपटने के लिए इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित आरजेएस पॉजिटिव मीडिया के संस्थापक उदय कुमार मन्ना के संयोजन में शिखर सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों ने सरकार से ‘राष्ट्रीय मीडिया साक्षरता मिशन’ शुरू करने का पुरजोर आह्वान किया। आरजेएस पॉजिटिव ब्रॉडकास्टिंग हाउस (PBH) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में सकारात्मक मीडिया आंदोलन के एक दशक पूरे होने का जश्न मनाया गया और वर्ष 2026 के लिए एक परिवर्तनकारी लक्ष्य निर्धारित किया गया: यह सुनिश्चित करना कि राष्ट्रीय मीडिया सामग्री का 90% हिस्सा तथ्यात्मक और रचनात्मक हो। मीडिया गुरु प्रो.के जी सुरेश ने पाॅजिटिव मीडिया भारत -उदय संकल्प यात्रा, न्यूज लेटर दिसंबर अंक और मीडिया लिटरेसी वर्कशॉप का किया शुभारंभ.
आंदोलन के पुराने सहयोगी आरजेएस पीबीएस ऑब्जर्वर दीप माथुर ने अतिथियों का स्वागत किया। कहा कि इस दशक की उपलब्धि प्राचीन ज्ञान और आधुनिक तकनीक के बीच समन्वय स्थापित करना है।
इस सम्मेलन में ‘कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) के कुलपति और आईआईएमसी के पूर्व महानिदेशक एवं इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रो. (डॉ.) के.जी. सुरेश ने जोर देकर कहा कि मीडिया साक्षरता अब केवल पेशेवरों के लिए नहीं, बल्कि 5 से 95 वर्ष के हर नागरिक के लिए एक अनिवार्य जीवन कौशल है।
प्रो. सुरेश ने कहा, “हम सूचनाओं की ऐसी बमबारी के बीच रह रहे हैं जहाँ सच और गढ़े हुए झूठ के बीच फर्क करना लगभग असंभव हो गया है।” उन्होंने आधुनिक डिजिटल खतरों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया: ‘मैल-इंफॉर्मेशन’ (टीआरपी के लिए फैलाया गया आधा-अधूरा सच), ‘मिस-इंफॉर्मेशन’ (अनजाने में फैलाया गया गलत डेटा, जैसे व्हाट्सएप पर वायरल होने वाला ‘नाक में नींबू का रस डालने से कोरोना का इलाज’) और ‘डिस-इंफॉर्मेशन’—जो समाज में अशांति फैलाने के लिए जानबूझकर फैलाए गए झूठ हैं। प्रो. सुरेश ने उत्तर-पूर्वी भारतीयों के प्रति मीडिया के नजरिए की भी आलोचना की और कहा कि अक्सर आपसी विवादों को ‘नस्लीय हमला’ बताकर सनसनी फैलाई जाती है, जबकि यह केवल अज्ञानता पर आधारित होता है। उन्होंने स्कूलों और प्राथमिक स्तर से ही मीडिया साक्षरता सिखाने की आवश्यकता पर बल दिया।
योगी कवि आचार्य प्रेम भाटिया ने ‘तन, मन और धन’ के दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वस्थ शरीर और स्थिर मन के बिना उत्पादकता संभव नहीं है। उन्होंने ‘आत्मबोध’ (स्वयं की पहचान) को एक सकारात्मक समाज की पहली शर्त बताया। इसी कड़ी में बहाई समुदाय के प्रतिनिधि डॉ. ए. के. मर्चेंट ने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का संदेश देते हुए कहा कि वैश्विक दुनिया में एक हिस्से की तबाही पूरे ग्रह को खतरे में डालती है।

सकारात्मक भारत के इस विजन को आगे बढ़ाते हुए, आरजेएस के संस्थापक उदय कुमार मन्ना ने अपने जीवन के नए अध्याय ‘वानप्रस्थ’ की घोषणा की। मन्ना ने बताया कि वे 17 जनवरी से बिहार से अपनी राष्ट्रव्यापी “पाॅजिटिव मीडिया भारत -उदय संकल्प यात्रा ” शुरू करेंगे, जिसका उद्देश्य पाॅजिटिव थिंकिंग को जन-भागीदारी के माध्यम से प्रलेखित करना है। उन्होंने आरजेएस की पांचवीं पुस्तक भी प्रस्तुत की और बताया कि छठी पुस्तक 23 जनवरी 2026 को 77वां गणतंत्र दिवस और पराक्रम दिवस पर जारी की जाएगी।
डा दिनेश अल्बर्टसन और शंकुतला देवी ने भी अपने विचार व्यक्त किए तथा नये साल का संदेश दिया। मीडिया लिटरेसी की प्रश्नोत्तरी सत्र में उन्होंने टीआरपी और फेक‌ न्यूज को जांचने का आधार का सवाल उठाया।

आंदोलन की आर्थिक और सामाजिक पहुंच पर चर्चा करते हुए आरजेएस मीडिया न्यूज टीम के प्रमुख प्रखर वार्ष्णेय और सदस्या याशिका मित्तल ने बताया कि डेली डायरी फाउंडेशन ने संकल्प लिया कि 2047 तक मीडिया परिदृश्य में सकारात्मकता को एक कार्यात्मक वास्तविकता बनाया जाएगा। वहीं जेन नेक्स्ट वर्ल्ड मीडिया के निदेशक अनिल कुमार मौर्या और सहयोगी लक्ष्य आदि ने शामिल होकर कार्यक्रम को सफल किया।

उद्यमिता और राष्ट्रीय गौरव के संगम के रूप में ‘प्रभात नमकीन’ के निदेशक लक्ष्मण प्रसाद ने अपनी सफलता की कहानी साझा की, जिनके द्वारा 80 परिवारों का भरण-पोषण हो रहा है। । 1995 में मात्र 1,500 रुपये के मासिक वेतन से करियर शुरू करने वाले प्रसाद आज एक बड़े उद्योगपति हैं। उन्होंने युवाओं से उद्यमी बनने का आह्वान करते हुए कहा कि व्यापार में अपनी किस्मत बदलने और ‘मेक इन इंडिया’ में योगदान देने की अपार शक्ति है।
नेचर के कवि अशोक कुमार मलिक ने सकारात्मक आंदोलन को आज के समय की बेहद आवश्यकता पर जोर देकर कहा कि मीडिया साक्षरता के लिए नई पीढ़ियों को जागरूक करने का अभियान चलाया जाना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में कवयित्री सरिता कपूर ने अपनी बीमारी से उबरने की कहानी सुनाई और कविता के माध्यम से आशा का संदेश दिया। वहीं, डी.पी. कुशवाहा ने ‘अंत्योदय’ की अवधारणा पर जोर देते हुए सकारात्मक सोच को व्यक्तिगत और राष्ट्रीय प्रगति का आधार बताया। राजेन्द्र सिंह कुशवाहा,उदय शंकर सिंह, आशीष रंजन , खुश्बू झा, आदि शामिल हुए।
सम्मेलन का समापन वर्ष 2026 के लिए एक सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। उपस्थित सभी सदस्यों ने अपने-अपने क्षेत्रों में ‘सकारात्मकता के ब्रांड एंबेसडर’ बनने का वचन दिया। उदय कुमार मन्ना ने समापन करते हुए कहा, “हम सकारात्मक मीडिया के लोग हैं। हम एक परिवार है, और हमारा प्रलेखन ही आने वाली पीढ़ी के लिए हमारी विरासत है।”

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