नई दिल्ली- अहिंसा विश्व भारती एवं विश्व शांति केंद्र के संस्थापक जैन आचार्य लोकेशजी ने वीरायतन की पूजनीय संस्थापक आचार्य चंदनाजी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आचार्यश्री चंदनाजी करुणा, निस्वार्थ सेवा और आध्यात्मिक ज्ञान की प्रतीक थीं। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन मानवता के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया और शिक्षा, स्वास्थ्य, और मानवीय सहायता के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता से अनगिनत लोगों के जीवन को कष्ट, वेदना और अभाव से मुक्ति दिलाई उनके मार्गदर्शन में, वीरायतन सेवा-साधना का एक वैश्विक संस्थान के रूप में विकसित हुआ, जो वंचितों की गरिमा के साथ सेवा करता है
भगवान महावीर की शिक्षाओं की समर्पित साधिका आचार्यश्री चंदनाजी ने अपने विचारों और कार्यों दोनों में जैन सिद्धांतों का उदाहरण प्रस्तुत किया। उनकी दूरदृष्टि सीमाओं से परे थी, जिसने सेवा और सद्भाव की भावना से सभी क्षेत्रों के लोगों को लाभान्वित किया।
आचार्य चंदनाजी के सक्षम नेतृत्व और अथक पुरुषार्थ ने समाज पर एक अमिट छाप छोड़ी है। वे न केवल एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक थीं, बल्कि लाखों लोगों के लिए एक पोषणकारी उपस्थिति भी थीं, जो उन्हें प्रेमपूर्वक “माँ” कहकर पूजते थे।वे पहली (महिला साध्वी) आचार्य एवं पद्म पुरस्कार से सम्मानित थीं।
आचार्य लोकेशजी ने उनके साथ “जैना कन्वेंशन” के दौरान अमेरिका के विभिन्न स्थानों के संस्मरण साझा करते हुए कहा कि सार्वभौमिक प्रेम, अहिंसा और मानवता की सेवा की उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। इस वियोग की घड़ी में, हम वीरायतन परिवार और उनके सभी श्रद्धालुओं के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करते हैं।
उनकी आत्मा को शाश्वत शांति प्राप्त हो, और हम सभी उनके द्वारा सुंदर रूप से प्रकाशित मार्ग पर चलने का प्रयास करें और उनके मानवीय सेवा के अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प लें यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

