दिल्ली। महाराजा अग्रसेन भवन, त्रिनगर दिल्ली में
एनडीएस , न्यू डायट सिस्टम का तीन दिवसीय (24-26 अक्टूबर 2026) को हैल्थ कैंप में आरजेएस पाॅजिटिव मीडिया की 682वीं बैठक का आयोजन किया गया।
हैल्थ कैंप के आयोजक उचाना मंडी (जींद, हरियाणा) के निवासी सतीश जांगड़ा बताते हैं कि लगभग 3 साल पहले उनकी पत्नी सुमन काफी गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं।
उन्होंने जींद में आयोजित एक NDS शिविर में भाग लिया और उसी दिन से दवाइयां छोड़ दीं। 3 वर्षों में लगभग 90% तक स्वास्थ्य में सुधार आया । मुख्य वक्ता सुमन जांगड़ा ने पाॅजिटिव मीडिया को बताया कि NDS का अर्थ नेचुरल डाइट सिस्टम है, जिसमें प्रकृति द्वारा प्रदत्त प्राकृतिक भोजन (फल, कच्ची सब्जियां, पत्तियां) बिना पकाए और बिना किसी प्रोसेस के ग्रहण किया जाता है।
इसकी शुरुआत गुजरात के श्री बी. वी. चौहान जी द्वारा की गई थी। वह पिछले 30–35 वर्षों से केवल फलाहार पर हैं और 80 वर्ष की उम्र में भी पूरी तरह स्वस्थ हैं ।
श्रीमती सुमन जांगड़ा ने बताया कि खान-पान में बदलाव ही मेडिसिन है। सुबह ग्रीन जूस 11 -12 बजे दिया जाता है जो बनाना बहुत आसान है।
पालक, पुदीना, धनिया, अदरक, आंवला, लौकी, सहजन (मोरिंगा) के पत्ते, कड़ी पत्ता, तुलसी के पत्ते, नींबू और कोई भी मौसमी फल।
इसे मिक्सी में थोड़ा पानी मिलाकर पीसा जाता है, फिर छानकर स्वादानुसार हल्का नमक डालकर पिया जाता है।
दैनिक आहार दिनचर्या (पंचतत्व आधारित):
सुबह कोई नाश्ता नहीं दिया जाता जिससे शरीर को आकाश तत्व मिलता है ।
दोपहर लंच विभिन्न प्रकार के मौसमी फल और चटनियां दी जाती हैं, जिससे शरीर को अग्नि तत्व मिलता है और पाचन सुचारू होता है।
शाम/रात डिनर कच्ची सब्जियों के सलाद और तरह-तरह की चटनियां (खट्टी-मीठी व हरी चटनी) दी जाती हैं, जिससे जल तत्व मिलता है ।
5. शिविरों का आयोजन और भविष्य की योजना
दंपत्ति ने बताया कि अब तक ऑनलाइन माध्यमों और विभिन्न शिविरों के जरिए लगभग एक से डेढ़ लाख लोग इस डाइट पद्धति से लाभान्वित हो चुके हैं ।
हरियाणा के उचाना, हिसार, जींद, कुरुक्षेत्र और दिल्ली के मुंडका व त्रिनगर में इनके शिविर आयोजित किए गए हैं ।
सतीश जांगड़ा ने बताया कि नवंबर के अंत में दिल्ली में एक और बड़ा स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने की योजना है ।
कच्चा आहार (रॉ डाइट): दोपहर और शाम को केवल मौसमी फल (अग्नि तत्व), कच्ची सब्जियां/सलाद (जल तत्व) और मेवे खाए जाते हैं। पका हुआ भोजन, तेल, मसाले, नमक (सामान्य) और गैस के उपयोग को बंद या बेहद सीमित किया जाता है ।
दूध व डेयरी उत्पादों का पूर्ण त्याग: एनडीएस में दूध, दही, पनीर व मांसाहार को पूरी तरह वर्जित माना गया है, क्योंकि इन्हें शरीर में कफ, पित्त, टॉक्सिन और गंभीर बीमारियों की मुख्य वजह बताया गया है ।
2. प्रमुख प्रतिभागियों व वक्ताओं के अनुभव
राज सिंह यादव (बहादुरगढ़):
वर्ष 2004 से अनियंत्रित डायबिटीज (शुगर लेवल 350–450) और त्वचा की गंभीर एलर्जी से पीड़ित थे ।
एनडीएस अपनाने के बाद दवाइयां बंद हो गईं और ब्लड शुगर स्तर 90–125 के बीच सामान्य हो गया ।
सत्यनारायण दलाल (बहादुरगढ़):
पिछले 8 महीनों से एनडीएस का पालन कर रहे हैं। 30 साल पुराना नजला, थायराइड और डायबिटीज की समस्या जड़ से समाप्त होने का दावा किया ।
सीए सुनील कुमार गुप्ता (दिल्ली):
पिछले 20 वर्षों से बीपी, थायराइड, कोलेस्ट्रॉल और गंभीर डायबिटीज से जूझ रहे थे और रोजाना इंसुलिन व मुट्ठी भर दवाइयां लेते थे ।
7 अगस्त 2020 को एनडीएस से जुड़े और पिछले 6 वर्षों से उनकी सभी दवाइयां व इंसुलिन बंद हैं ।
उन्होंने पंचतत्वों (आकाश, वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी) के आधार पर प्राकृतिक कच्चे भोजन और श्रीमद्भगवद्गीता के 17वें अध्याय के अनुसार ‘रसयुक्त सात्विक आहार’ का वैज्ञानिक व आध्यात्मिक महत्व समझाया ।
मोहन रवि (उम्र 70 वर्ष, करोल बाग):
25 वर्षों से डायबिटीज के मरीज थे। कैंप में आने के बाद एनिमा व कच्चे फल-आहार और 18 घंटे के उपवास के जरिए बिना दवा के उनका शुगर लेवल 381 से घटकर 105 पर आ गया ।
सीमा सांगवान (लक्ष्मी नगर, दिल्ली):
650 शुगर लेवल रहता था। कैंप में बिना पके स्वादिष्ट कच्चे व्यंजन (जैसे कच्चे केले की सब्जी, खजूर की चटनी, पोहा व सलाद) खाने के बाद ऊर्जावान महसूस किया ।
बीके दीपक (युवा साधक):
2020 से बी.वी. चौहान जी के मार्गदर्शन में एनडीएस अपना रहे हैं। उन्होंने युवाओं में खराब जीवनशैली के दुष्प्रभावों और कच्चे प्राकृतिक भोजन द्वारा शरीर की प्राकृतिक डिटॉक्सिफिकेशन (ऑटोफैगी) प्रणाली के बारे में बताया ।
मनप्रीत कौर (अमृतसर):
एनडीएस अपनाकर अपना वजन 110 किलोग्राम से घटाकर 74 किलोग्राम किया ।
उन्होंने महिलाओं और गृहिणियों के लिए रसोई में बिना गैस जलाए कच्ची सब्जियों, मखाने, स्मूदी और ग्रीन जूस से संपूर्ण व पौष्टिक थाली तैयार करने के तरीके साझा किए ।
निष्कर्ष
पूरे वीडियो में यह संदेश दिया गया है कि भोजन पकाने से उसके प्राकृतिक पोषक तत्व और जीवन रस नष्ट हो जाते हैं। केवल प्राकृतिक, मौसमी और कच्चा आहार (फल, पत्तियां, सब्जियां) अपनाकर तथा आंतों की समय पर सफाई करके डायबिटीज, बीपी, थायराइड और मोटापे जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से बिना दवा के राहत पाई जा सकती है ।
आरजेएस बैठक में खुलासा : न्यू डायट सिस्टम NDS में कच्चा खाना है सेहत का खज़ाना
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