Monday, February 9, 2026
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आरजेएस के 520वें कार्यक्रम में ग्रंथ 06 पुस्तक का देवास मध्य प्रदेश में लोकार्पण

नई दिल्ली – संयुक्त राष्ट्र के ‘अंतरराष्ट्रीय मानव बंधुत्व दिवस’ और ‘विश्व अंतरधार्मिक सद्भाव सप्ताह’ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में पाॅजिटिव मीडिया भारत-उदय ग्लोबल मुवमेंट को एक नई दिशा देते हुए ‘राम जानकी संस्थान पॉजिटिव ब्रॉडकास्टिंग हाउस’ (आरजेएस पीबीएच) और आरजेएस पाॅजिटिव मीडिया ने मध्य प्रदेश के देवास में अपने आरजेएस पाॅजिटिव ब्रांच के गठन की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके निमित्त एक विशेष ‘वर्चुअल-फिजिकल’ हाइब्रिड वेबिनार “संत कबीर की अमृतवाणी में कर्म और भक्ति दर्शन” विषय पर टीफा26 के सशक्त आरजेसियन कबीर लोक गायक आकाशवाणी दूरदर्शन करण सिंह पोरवाल ने दयाराम सारोलिया की अगुवाई में 8फरवरी 2026 को को-ऑर्गेनाइज किया और ग्रंथ 06 पुस्तक का लोकार्पण हुआ।

आरजेएस पीबीएस के संस्थापक उदय कुमार मन्ना ने बताया कि देवास मध्य प्रदेश के कबीर लोक गायक दयाराम सारोलिया व करण सिंह पोरवाल को दिल्ली में 12 फरवरी को आईसीएमईआई – आरजेएस पीबीएस का अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिलेगा ।
कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत करते हुए देवास के गायक करण सिंह पोरवाल ने कबीर अमृत वाणी के माध्यम से वेबिनार में गायन के माध्यम से आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया। पोरवाल ने जीवन को सकारात्मक बनाने में ‘तीन गुरुओं’ की भूमिका पर प्रकाश डाला—माता-पिता (प्रथम), शिक्षक (द्वितीय) और यह संसार (तृतीय), जो व्यक्ति को जीवन जीने की कला सिखाता है। करण पोरवाल ने गर्व व्यक्त किया कि आरजेएस के माध्यम से देवास की क्षेत्रीय प्रतिभा को एक वैश्विक डिजिटल मंच प्राप्त हो रहा है।15वीं सदी के महान संत कबीर दास की शिक्षाओं को आधुनिक भारत के ‘अमृत काल’ के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में प्रस्तुत किया।
कर्म और भक्ति का दर्शन
वेबिनार के केंद्र में संत कबीर के ‘कर्म’ और ‘भक्ति’ दर्शन पर गहन बौद्धिक विमर्श रहा। मुख्य अतिथि प्रोफेसर शैलेंद्र कुमार शर्मा (विभागाध्यक्ष एवं कुलानुशासक, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन) ने अपने संबोधन में कबीर के जीवन दर्शन की व्याख्या की। उन्होंने तर्क दिया कि कबीर के लिए श्रम और श्रद्धा एक ही सिक्के के दो पहलू थे।
राष्ट्रीय एकता के सूत्रधार के रूप में कबीर
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. हरी सिंह पाल (साहित्यकार एवं महामंत्री, नागरी लिपि परिषद, दिल्ली) ने कबीर की वैश्विक प्रासंगिकता पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने ऐतिहासिक साक्ष्यों का उल्लेख करते हुए बताया कि कबीर के दर्शन का वैश्विक प्रभाव सदियों पुराना है। उन्होंने इटली के पादरी मार्को डेला टोम्बा द्वारा 1758 में किए गए कबीर के कार्यों के अनुवाद का विशेष उल्लेख किया।
सामाजिक सुधार और रूढ़ियों का खंडन
मुख्य वक्ता और प्रसिद्ध लोक गायक दयाराम सरोलिया ने संत कबीर को एक ‘राष्ट्रवादी समाज सुधारक’ के रूप में चित्रित किया। उन्होंने काशी और मगहर से जुड़ी प्राचीन रूढ़ियों को तोड़ने के कबीर के साहसी निर्णयों पर विस्तार से चर्चा की। सरोलिया ने बताया कि कबीर ने मगहर में अपने प्राण त्यागने का विकल्प सिर्फ इसलिए चुना ताकि वे उस अंधविश्वास को खत्म कर सकें कि केवल काशी में मरने से स्वर्ग मिलता है।
आरजेएस पीबीएस के सह-आयोजक राजेश परमार साहेबजी ने बताया कि 30 वें मालवा कबीर यात्रा को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से 21 फरवरी 2026 को सवा आठ बजे से वर्चुअल फिजिकल कार्यक्रम को ऑर्गेनाइज करेंगे जिससे नशा खोरी, अंधविश्वास और सांप्रदायिक वैमनस्य के खिलाफ सकारात्मक चेतना जागृत करना है। 19 फरवरी से मालवा कबीर यात्रा पद्मश्री प्रह्लाद सिंह टिपानिया की अगुवाई में देवास के पांडा जागिर गांव से शुरू होकर
22 फरवरी को इंदौर के रवींद्र नाट्य गृह में भव्य समापन होगा।
नागपुर की टीफा 26 डॉ. कविता परिहार ,रति चौबे, डीपी सिंह कुशवाहा,उदय शंकर सिंह कुशवाहा और राकेश मनचंदा आदि शामिल रहे। इसके अतिरिक्त प्रतिभागियों में डा सतीश कुमार सिंह,सुंदर लाल मालवीय,अरूण पासवान , कुलदीप सारोलिया,लता जोशी, जयवीर सिंह, प्रियांशु सिंह परमार,संदीप परमार,हिमांशु सिंह,नेहा पोरवाल, बीपी निदारिया, हर्ष भंडारी, अश्विनी केगांवकर और राजमल मालवीय आदि शामिल हुए।

यह कार्यक्रम अकादमिक चर्चा, पारंपरिक लोक गायन और सकारात्मक पत्रकारिता का एक अनूठा संगम रहा। आरजेएस के संस्थापक और कार्यक्रम के संचालक उदय कुमार मन्ना के नेतृत्व में, इस वेबिनार ने प्राचीन आध्यात्मिक मूल्यों और भारत के ‘आत्मनिर्भर’ बनने के आधुनिक संकल्प के बीच एक सेतु का निर्माण किया। वेबिनार का समापन इस साझा संकल्प के साथ हुआ कि संत कबीर की 15वीं सदी की ‘सत्य की क्रांति’ आज के डिजिटल युग में और अधिक प्रासंगिक है। अपनी क्षेत्रीय शाखाओं, अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों और निरंतर दस्तावेजीकरण के माध्यम से, आरजेएस पीबीएच यह सुनिश्चित कर रहा है कि ‘सकारात्मक भारत उदय’ का यह स्वर वैश्विक स्तर पर गूँजता रहे।

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