चंदौली: गंगा नदी में करीब तीन दशक बाद हिल्सा मछली की चंदौली तक वापसी ने नदी की सेहत में हो रहे सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जगाई है। चंदौली के टांडा खुर्द के पास हिल्सा के मिलने को विशेषज्ञ इसलिए महत्वपूर्ण मान रहे हैं, क्योंकि यह मछली समुद्र से नदियों में प्रवेश कर प्रजनन के लिए लंबी दूरी तक ऊपर की ओर प्रवास करती है ।
हिल्सा के इस प्राकृतिक प्रवास के लिए नदी में पर्याप्त जल प्रवाह, बेहतर ऑक्सीजन स्तर, अनुकूल तापमान और सुरक्षित प्रवास मार्ग बेहद जरूरी होते हैं। ऐसे में चंदौली तक हिल्सा का पहुंचना संकेत देता है कि गंगा के कुछ हिस्से अब उसके लिए पहले की तुलना में अधिक अनुकूल हो रहे हैं।
हिल्सा बंगाल की खाड़ी से गंगा में प्रवेश करती है और प्रजनन के लिए नदी के ऊपरी हिस्सों की ओर जाती है। हालांकि, वर्ष 1975 में फरक्का बैराज के निर्माण के बाद उसके प्राकृतिक प्रवास मार्ग में बड़ा अवरोध पैदा हुआ, जिसके चलते फरक्का के ऊपर हिल्सा की उपलब्धता में भारी गिरावट दर्ज की गई।
बता दें कि हिल्सा के प्राकृतिक प्रवास को दोबारा बहाल करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय अंतर्देशीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान ने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के साथ वर्ष 2019 से प्रयास शुरू किए। इसी अभियान के तहत फरक्का के ऊपर 3.85 लाख से अधिक हिल्सा मछलियां छोड़ी जा चुकी हैं।
अब चंदौली तक हिल्सा की वापसी इन संरक्षण प्रयासों और गंगा के बदलते पर्यावरणीय हालात के लिए एक सकारात्मक संकेत के तौर पर देखी जा रही है।

