नई दिल्ली |
राजधानी दिल्ली के मंगोलपुरी स्थित मां जगदम्बे परिसर में आयोजित एक भव्य केंद्रीय बैठक में हुई पत्रकार वार्ता के माध्यम से देश के प्रतिष्ठित संतों और गौभक्तों ने ‘गो सम्मान आह्वान अभियान’ की रूपरेखा प्रस्तुत की। पूज्य संतों के सान्निध्य में हुई इस घोषणा के अनुसार, आगामी 27 अप्रैल 2026 को संपूर्ण भारत में ‘गो सम्मान दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाना और देश में गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध हेतु केंद्रीय कानून सुनिश्चित करना है।
संतों का संकल्प और प्रमुख मांगें
पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए मलूक पीठ के पूज्य गोपेश कृष्ण दास जी महाराज, कृष्णायन गोशाला के पूज्य अच्युतानंद जी महाराज और श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के संरक्षक पूज्य रविन्द्रानंद जी सरस्वती सहित अनेक गणमान्य संतों ने एक स्वर में सरकार से गौवंश के संरक्षण हेतु ठोस नीतियां बनाने का आग्रह किया। संतों ने मांग की है कि गौहत्या और गौतस्करी में लिप्त अपराधियों के लिए आजीवन कारावास का प्रावधान हो, जब्त वाहनों को गौशालाओं के सुपुर्द किया जाए और सरकारी भवनों में गोबर पेंट व गौनाइल का उपयोग अनिवार्य हो। इसके अतिरिक्त, गौशालाओं को मनरेगा से जोड़ने और गोबर-गोमूत्र पर आधारित अनुसंधान विश्वविद्यालय स्थापित करने की भी पुरजोर मांग की गई।
चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति
अभियान की कार्ययोजना के अनुसार, जनवरी से मार्च 2026 तक चले राष्ट्रव्यापी प्रचार के बाद अब 27 अप्रैल को देश की सभी तहसीलों और तालुकों के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्रियों को प्रार्थना पत्र सौंपे जाएंगे। यदि सरकार की ओर से अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिलती है, तो जुलाई और अक्टूबर 2026 में इस प्रक्रिया को पुनः दोहराया जाएगा। आंदोलन के अगले चरण में 27 फरवरी 2027 को देश के 800 जिलों और 5000 तहसीलों से संत और गौभक्त दिल्ली में एकत्रित होंगे और 15 अगस्त 2027 तक निरंतर शांतिपूर्ण संकीर्तन करेंगे। संतों ने स्पष्ट किया है कि यदि इसके बाद भी समाधान नहीं निकला, तो संत समाज गंगाजल पान कर उपवास और अंततः आमरण अनशन का मार्ग अपनाएगा।
गैर-राजनीतिक और अहिंसक स्वरूप
इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता इसका पूर्णतः गैर-राजनीतिक और आध्यात्मिक होना है। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यह आंदोलन किसी दल या संस्था के बैनर तले नहीं, बल्कि केवल गौमाता और नंदी महाराज के चित्र के प्रतीक तले संचालित होगा। अभियान पूरी तरह अहिंसक रहेगा, जिसमें किसी भी प्रकार की मंचीय उद्घोषणा या राजनीतिक भाषणबाजी नहीं होगी। केवल संकीर्तन और प्रार्थना के माध्यम से जन-जागरण का संदेश दिया जाएगा।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर भजन सम्राट प्रकाश जी महाराज, महंत चंद्रमादास जी महाराज (हनुमान गढ़ी), विहिप के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जगन्नाथ शाही, शांतिकुंज हरिद्वार के परमानंद जी द्विवेदी और दिल्ली-NCR पथमेड़ा के अध्यक्ष डॉ. वीरेन्द्र जी गर्ग सहित विभिन्न संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे।
दिल्ली से राष्ट्रव्यापी ‘गौ सेवा अभियान’ का शंखनाद; 27 अप्रैल को देश भर में मनाया जाएगा ‘गो सम्मान दिवस’
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