नई दिल्ली। राम जानकी संस्थान पॉजिटिव ब्रॉडकास्टिंग हाउस (आरजेएस पीबीएच) और आरजेएस पाॅजिटिव मीडिया,नई दिल्ली द्वारा 31 मार्च 2026 को आयोजित “वीरों की अहिंसा” पर कार्यक्रम दुनिया के तनाव भरे माहौल में, भगवान महावीर के सिद्धांतों की ओर लौटने का एक निर्णायक आह्वान था, जिसे न केवल एक धार्मिक पालन के रूप में, बल्कि 21वीं सदी के लिए एक रणनीतिक आर्थिक और सामाजिक अनिवार्यता के रूप में देखा गया।
आरजेएस पीबीएच के संस्थापक व राष्ट्रीय संयोजक उदय कुमार मन्ना ने कहा कि भगवान महावीर का “जियो और जीने दो” का मूल मंत्र केवल एक नारा नहीं है, बल्कि यह ग्रह के अस्तित्व के लिए एक मौलिक आवश्यकता है। आरजेएस पीबीएच के राष्ट्रीय ऑब्जर्वर दीप माथुर , मुख्य अतिथि नितिन मेहता, एमबीई, समाजसेवी डा.दीपक जैन तथा टीफा26 की उपस्थिति में फरवरी – मार्च का संयुक्त मंथली न्यूज़लेटर 2026 लॉन्च किया गया। न्यूज लेटर का ये अंक आरजेएस पीबीएस -आरजेएस पाॅजिटिव मीडिया के प्रेरणास्रोत स्व० श्री राम जग सिंह (निधन 28 फरवरी 2026) की स्मृति को समर्पित था ।
मुख्य अतिथि लंदन स्थित इंडियन वेजिटेरियंस एंड वेगन सोसाइटी के संस्थापक नितिन मेहता (एमबीई) ने यूनाइटेड किंगडम में शाकाहार और योग में भारी वृद्धि की सूचना दी।
कई ब्रिटिश नागरिक अब अहिंसा के पालन में अपने भारतीय समकक्षों की तुलना में अधिक कठोर हैं। श्री मेहता ने यूके में एक बढ़ते आंदोलन का विवरण दिया जहां लोग चमड़े के उत्पादों—जिसमें सोफे, जूते और बेल्ट शामिल हैं—का उपयोग करने से इनकार करने लगे हैं ,क्योंकि उनका सीधा संबंध कसाईखाने की क्रूरता से है। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश नागरिक तेजी से योग को आहार की नैतिकता से जोड़ रहे हैं, जिससे चरित्र की एक ऐसी शुद्धता पैदा हो रही है जो उन्हें भारतीय दर्शन के साथ गहरे संबंध बनाने के लिए प्रेरित करती है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भगवान महावीर निर्वाण महोत्सव समिति के महासचिव डॉ. दीपक जैन ने इस आम गलतफहमी को चुनौती दी कि अहिंसा कमजोरों की शरणस्थली है। डॉ. जैन ने जोर देकर कहा कि सच्ची वीरता के पांच आंतरिक शत्रुओं अहंकार, लोभ, क्रोध, मोह और घृणा पर विजय प्राप्त करना है। उन्होंने उल्लेख किया कि उनके पुत्र का नाम, अरिहंत, इसी सिद्धांत को श्रद्धांजलि थी, जो बाहरी शत्रुओं के बजाय आंतरिक शत्रुओं के विनाश का प्रतीक है। उन्होंने उल्लेख किया कि एक शाकाहारी व्यक्ति का कार्बन फुटप्रिंट पशु उत्पादों के उपभोक्ता की तुलना में काफी कम होता है, उन्होंने ऑटोफैगी के जापानी वैज्ञानिक अध्ययन का उल्लेख किया, जो सूर्यास्त से पहले भोजन करने और उपवास के जैन अभ्यास को प्रतिध्वनित करता है। इसे आधुनिक चिकित्सा विज्ञान द्वारा दीर्घायु और कैंसर की रोकथाम के लिए आवश्यक माना जा रहा है।
प्रवासी भारतीय नरेंद्र के.जैन(राजस्थान ) ने माॅरीशस में आयोजित महावीर जयंती पर अहिंसा वॉक और सामूहिक प्रार्थनाओं के संचालन में जैन समुदाय के व्यावहारिक प्रयासों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि बच्चों को णमोकार मंत्र के पाठ और अहिंसा के अध्ययन में शामिल करने की प्रतिबद्धता प्राथमिकता बनी हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लक्ष्य अहिंसा के दर्शन को अगली पीढ़ी के लिए एक व्यावहारिक, दैनिक आदत बनाना है।
कार्यक्रम में टीफा 26 दयाराम सारोलिया,उदय शंकर सिंह कुशवाहा, शुभ्रा सिंह, स्वीटी पाॅल , राकेश मनचंदा,बीना जैन, राम जैन, संतोषानंद , मयंक राज और आकांक्षा आदि शामिल हुए ।

