नई दिल्ली — हिंदी पत्रकारिता की 200वीं वर्षगांठ के अवसर पर, राम जानकी संस्थान पॉजिटिव ब्रॉडकास्टिंग हाउस (RJS PBH) द्वारा आयोजित और राष्ट्रीय संयोजक उदय कुमार मन्ना के नेतृत्व में, 570वें वर्चुअल सेमिनार ने 1826 में प्रकाशित भारत के पहले हिंदी समाचार पत्र “उदंत मार्तंड” के 30 मई शुभारंभ का जश्न मनाया। पत्रकारों का आर्थिक और व्यावसायिक अस्तित्व भी चर्चा के केंद्र में रहा।
आरजेएस पीबीएच के राष्ट्रीय ऑब्जर्वर दीप माथुर ने अतिथियों का स्वागत किया। सूचना और प्रचार निदेशालय (एमसीडी) के पूर्व निदेशक दीप चंद माथुर ने अपने कार्यकाल को याद करते हुए जहां हिंदी पत्रकारिता, अंग्रेजी मीडिया की तुलना में ऐतिहासिक हाशिए का सामना करने के बावजूद, आम आदमी से जुड़ी सच्ची आवाज बनी रही।
कार्यक्रम में विश्व विख्यात मीडिया विशेषज्ञ डॉक्टर संदीप मारवाह प्रोफेसर (डॉ.) के जी सुरेश और डॉ. पवन दुग्गल ने एआई के युग में पॉजिटिव मीडिया परिवार को संबोधित कर जागरूक किया। औरंगाबाद, बिहार की उभरती प्रतिभा 14 वर्षीया लोक गायिका तान्या माओर की गायन ने मंत्रमुग्ध किया.
इस अवसर पर आरजेएस पीबीएच ने आधिकारिक तौर पर अपना मासिक दस्तावेजीकरण “पाॅजिटिव मीडिया “न्यूज़लेटर जारी किया, जिसमें मई माह की सभी गतिविधियां दर्ज हैं।
पाॅजिटिव मीडिया के संरक्षक मुख्य अतिथि नोएडा फिल्म सिटी के संस्थापक और एएएफटी विश्वविद्यालय के चांसलर डॉ. संदीप मारवाह ने हिंदी की सामाजिक और वैश्विक पहुंच पर एक आशावादी दृष्टिकोण प्रदान किया। ऑस्ट्रेलिया, नाइजीरिया और सेनेगल की हालिया यात्राओं के किस्से साझा करते उन्होंने कहा कि हिंदी सीमाओं के पार कैसे जीवित है और पनप रही है। उन्होंने कहा कि अकेले ऑस्ट्रेलिया में, लगभग दस लाख लोग अपने दैनिक जीवन में भाषा को जीवित रखे हुए हैं।डॉ. मारवाह ने आरजेएस पीबीएच -पाॅजिटिव मीडिया परिवार को फिल्म निर्माण, टेलीविजन उत्पादन और मीडिया निर्माण में पत्रकारों को प्रशिक्षित करने के लिए मारवाह स्टूडियो में एक दिवसीय कार्यशाला की मेजबानी करने की पेशकश की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भारतीय जनसंचार संस्थान के पूर्व महानिदेशक और इंडिया हैबिटेट सेंटर के वर्तमान निदेशक प्रो. केजी सुरेश ने एआई डीपफेक और गलत सूचनाओं से निपटने के लिए मीडिया साक्षरता की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर जोर दिया, यह देखते हुए कि वरिष्ठ पत्रकार भी अक्सर मनगढ़ंत वीडियो और झूठे एआई संदर्भों से धोखा खा जाते हैं।उन्होंने आधुनिक मीडिया में गहराते ध्रुवीकरण और “मन भेद” के बारे में खतरे की घंटी बजाई।प्रो. सुरेश ने जिला स्तर के पत्रकारों की आर्थिक अनिश्चितता की ओर महत्वपूर्ण ध्यान आकर्षित किया।
मुख्य वक्ता सुप्रीम कोर्ट के वकील और साइबर तथा एआई कानून के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ डॉ. पवन दुग्गल ने एआई को भारतीय पत्रकारिता की नौकरियों के लिए सीधा खतरा बताया। उन्होंने कहा कि एआई को नियंत्रित रखें पत्रकार और आनेवाले समय में सुपर इंटेलिजेंस के लिए भी तैयार रहें।उन्होंने एआई प्रणालियों के साथ व्यक्तिगत डेटा साझा करने के खिलाफ सख्त सलाह दी।
कार्यक्रम में सकारात्मक मीडिया के सामाजिक प्रभाव पर भी भारी ध्यान केंद्रित किया गया। उदय कुमार मन्ना ने औरंगाबाद, बिहार की उभरती प्रतिभा 14 वर्षीय गायिका तान्या माओर को प्रस्तुत किया, जिसने लाइव प्रस्तुति दी। सुश्री तान्या संगीत शिक्षक सुनील माओर की सुपुत्री है।
मन्ना ने सकारात्मक पत्रकारिता के लिए एक केस स्टडी के रूप में उनका उपयोग किया, ग्रामीण प्रतिभाओं और सांस्कृतिक कलाओं को उजागर करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिन्हें अक्सर मुख्यधारा, संघर्ष-संचालित मीडिया द्वारा अनदेखा कर दिया जाता है।
भविष्य की ओर देखते हुए, मन्ना ने आगामी विशिष्ट पहलों की घोषणा की, विशेष रूप से 9 अगस्त से 15 अगस्त तक निर्धारित 7-दिवसीय राष्ट्रव्यापी स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम। इस पहल का उद्देश्य प्रचलित नकारात्मकता पूर्वाग्रह का मुकाबला करते हुए, “राष्ट्र प्रथम” पत्रकारिता को बढ़ावा देना है। आरजेएस पीबीएच के लिए नवनियुक्त नोएडा प्रभारी, उदय शंकर सिंह कुशवाहा ने सकारात्मक मीडिया नेटवर्क के विस्तार पर जोर देते हुए अगस्त के कार्यक्रमों की तैयारियों की पुष्टि की।
सेमिनार इस आम सहमति के साथ संपन्न हुआ कि यद्यपि एआई एक अपरिहार्य उपकरण है जिस पर महारत हासिल की जानी चाहिए, मानवीय सहानुभूति, कठोर सत्यापन, और “उदंत मार्तंड” की मूलभूत नैतिकता सत्य के लिए एकमात्र सच्चा रास्ता है। डॉ. दुग्गल ने संक्षेप में कहा, “एआई एक बहुत अच्छा नौकर है, लेकिन बहुत खराब मालिक है। हमें एआई को कभी भी मालिक नहीं बनने देना चाहिए।”
एमसीडी में रहे अपने निदेशक के कार्यकाल में हिन्दी पत्रकार बनाम अंग्रेजी पत्रकार पर दृष्टिपात किया। उन्होंने ये भी बताया कि वो आठवीं कक्षा से अंग्रेजी माध्यम में उच्च शिक्षा और मास कम्युनिकेशन की डिग्री ली, लेकिन एमसीडी के सूचना निदेशालय में आकर हिंदी को समझकर अपने कामकाज में बेहतरीन उपयोग किया।
प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में प्रखर वार्ष्णेय,प्रशांत यादव,दुर्गा प्रसाद मिश्र,यशिका मित्तल,ब्रह्मानंद झा,खुशबू झा,कनक माथुर,जेनिया चड्ढा,जोगिंदर सिंह,भारती सिंह और हिमांशु सिंह, सोनू कुमार मिश्रा,आशीष रंजन, डा.अरूणेश कुमार द्विवेदी,बृजनंदन प्रसाद, दयाराम सारोलिया,करण सिंह पोरवाल,डा.जय भगवान दहिया, डा.कमलेश सिसोदिया, सुदीप साहू,इशहाक खान,डा.कविता परिहार, रति चौबे, ममता करण पोरवाल, ओम् सापरा, पवन कुमार, आर एस कुशवाहा, रजनी कान्त शुक्ला, राकेश मनचंदा, सोनू सिंह, सुनील कुमार सिंह, स्वीटी पाॅल, उमेश ठाकुर,शुभम मिश्रा,सोनाली सिंह, मयंक और आकांक्षा आदि शामिल हुए।
कार्यक्रम का आरजेएस पाॅजिटिव मीडिया पर लाईव प्रसारण हुआ और क्रिएटिव टीम और सोशल मीडिया टीम ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

